हंसी-ठहाकों के बीच सजा अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध अनुराग-31 में गूंजे हास्य और व्यंग्य के स्वर, देर रात तक झूमे श्रोताकवि सम्मेलन में हास्य, व्यंग्य और ओज का संगम, पंडाल तालियों से गूंजा
*वंदे मातरम होने पर दिल पर भारत रखता हूं…”* ****************************** *खूब लगे ठहाके,मध्यरात्र…